शॉर्ट सेलिंग क्या है?

फोरेक्स ट्रेडिंग दरअसल भविष्य में एक करेंसी पेयर का मूल्य क्या होगा, इसका अनुमान लगाना है। फोरेक्स ट्रेडर इस बात का अनुमान लगा सकते हैं कि करेंसी पेयर का मूल्य भविष्य में ऊपर जाएगा या नीचे। आम तौर पर, जब कारोबारी महसूस करते हैं की कीमतें गिरने वाली हैं, तो करेंसी पेयर को शॉर्ट सेल करते हैं।

जब ट्रेडर किसी करेंसी पेयर को शॉर्ट सेल करते हैं, तो वे आकलन करते हैं कि मुद्रा-जोड़ी का मूल्य निकट भविष्य में कम हो जाएगा। शॉर्ट सेलिंग बाजार में गिरती कीमतों से प्रॉफिट कमाने का का एक तरीका है। CFD ट्रेडिंग की तरह फोरेक्स ट्रेडिंग पूरी तरह से कम दाम पर खरीदने और ऊँची कीमत पर बेचना नहीं है। शॉर्ट सेलिंग के जरिये हम ऊँचाई पर बेचते और फिर निचले स्तर पर खरीदते हैं।

नौसिखिया ट्रेडर के लिए आम तौर पर इस अवधारणा को समझने में कठिनाई होती है। सबसे आम सवाल यह है, कोई उस चीज को कैसे बेच सकता है जिसका वहा मालिक नहीं है? फोरेक्स ट्रेडिंग में कभी भी हमारा किसी चीज पर स्वामित्व नहीं होता, क्योंकि यहाँ ट्रेडिंग फ्यूचर वैल्यू के बारे में शुद्ध अटकलें है।

शॉर्ट सेलिंग कैसे की जाती है?

जब आप शॉर्ट सेल करते हैं, तो आप अनुमान लगाते हैं कि भविष्य में किसी विशेष समय में उस ख़ास वित्तीय साधन का मूल्य कम होगा। ट्रेड करते समय आप इसे एक विशिष्ट समय में, निर्दिष्ट कीमत पर खरीदने की वचनबद्धता दते हैं।

इस तरह चलने वाले बिजनेस के वास्तविक उदाहरण भी हैं। अगर आप एक नई कार खरीदना चाहते हैं जो स्टॉक में नहीं है, तो यह डीलर को उस कार बेचने से नहीं रोकती है। वे आपको साझी सहमति से तयशुदा कीमत पर आपको कार खरीदने की अनुमति देंगे, और बाद में वे आपके लिए कार खरीद लायेंगे।

इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि वे उसी कीमत पर कार की डिलीवरी करने में सक्षम होंगे जिस पर वे आज कर सकते हैं। जाहिर है, वे कुछ रिस्क लेते हैं। ट्रेडिंग में यही मेकेनिज्म काम करता है। पहले बेचो, और बाद में खरीदो, डिलीवरी करने के लिए।

फोरेक्स मार्केट में शॉर्ट सेल

विदेशी मुद्रा बाजार में ट्रेडिंग का मतलब हमेशा एक ही समय में मुद्राओं को बेचना और खरीदना होता है। लेनदेन को शेयर बाजार से कुछ अलग तरह से किया जाता है, जहाँ एक ही स्टॉक की खरीद या बिक्री होती है।

फोरेक्स मार्केट में, मुद्राओं को जोड़े में कोट किया जाता है। इसका मतलब है, अगर आप USD/ZAR पेयर को बेचने की कोशिश करते हैं, तो आप दरअसल एक साथ दो ट्रांजेक्शन करते हैं। एक तरफ आप अमेरिकी डॉलर बेच रहे हैं, और उसी समय दक्षिण अफ़्रीकी रैंड खरीद रहे हैं। यदि आप EUR / USD मुद्रा पेयर को खरीदते हैं, तो आप एक ही समय में यूरो को खरीद रहे हैं और अमेरिकी डॉलर को बेच रहे हैं।

विदेशी मुद्रा बाजार में शॉर्ट सेल आसान है क्योंकि एक ट्रेडर को दो-तरफा प्राइस कोटेशन प्रदान किया जाता है। बिड प्राइस यानी लगाई गयी बोली वह मूल्य है जिस पर आप खरीद सकते हैं, और मांग की गयी कीमत वह मूल्य है जिस पर आप बेच सकते हैं।

शॉर्ट सेल के उदाहरण

माना कि आपको लगता है, कुछ ही समय में सोने की कीमत गिरने वाली है। हमारे ट्रेड में, हम सोने की शॉर्ट सेलिंग करके मुनाफा कमाने वाले हैं। जहां हम शॉर्ट सेलिंग ट्रेड शुरू करेंगे, और जहां हम ट्रेड बंद करेंगे, वह इस ट्रेड में हमारे लाभ या नुकसान को तय करेगा।

 

इस उदाहरण में, हम सोना बेच रहे हैं, इस उम्मीद के साथ कि हम इसे बाद में सस्ती दर पर खरीद सकते हैं।

आइए मान लेते हैं, हम $1345 के रेजिस्टेंस लेवल पर अपनी पोजीशन शॉर्ट करना शुरू करते हैं। बाजार हमें सही साबित करता है, और अब हमारे पास इस ट्रेड में प्रॉफिट तोड़ने का अवसर मिल गया है।

उदाहरण 2:

फोरेक्स करेंसी पेयर के मामले में भी शॉर्ट सेलिंग ऐसे ही काम करती है। यदि आप मानते हैं कि एक करेंसी पेयर में गिरावट की संभावना है, तो आप एक शॉर्ट सेलिंग पोजीशन शुरू कर सकते हैं और कीमतों में गिरावट का फायदा उठा सकते हैं।

इस उदाहरण में, एक USD/ZAR टेक्नीकल पैटर्न में मंदी की रुझान विकसित हो रही है। जब हम बाजार में ट्रेडिंग कर रहे हैं, तो एक अच्छी फोरेक्स स्ट्रेट्जी होती है, बाजार में मौजूदा ट्रेंड के उलटने (retracement) या पुलबैक की प्रतीक्षा करना है। इस तरह एक कारोबारी इस सोच के साथ शॉर्ट सेल करने की कोशिश करता है कि कि अंततः वह प्रवृत्ति फिर से लौट आयेगी।

 

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निष्कर्ष

शॉर्ट सेलिंग एक ट्रेडिंग तकनीक है जो गिरते रुझान वाले मार्केट से लाभ कमाने के लिए इस्तेमाल की जाती है। शॉर्ट सेलिंग को एक हेजिंग मेकेनिज्म के रूप में कीमतों में मंदी की ओर गिरावट के खिलाफ स्मार्ट मणी की रक्षा करने के लिए उपयोग में लाया जाता है। सभी व्यापारिक गतिविधियों की तरह, शॉर्ट सेलिंग के अपने जोखिम हैं। अगर कीमतों में कोई नाटकीय उछाल आता है, तो आप अपने सभी वास्तविक निवेश को खो सकते हैं।

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