तकनीकी विश्लेषण बनाम मौलिक विश्लेषण (Technical Analysis Vs. Fundamental Analysis)

विदेशी मुद्रा कारोबार में, दो मुख्य किस्म के विश्लेषण होते हैं – मौलिक विश्लेषण (Fundamental analysis) और तकनीकी विश्लेषण (Technical analysis)। इस सवाल का कोई जवाब नहीं है कि इनमें से कौन सी टेकनीक बेहतर है, क्योंकि यह ट्रेडर के व्यक्तित्व पर निर्भर करता है। दोनों ही निवेशक से धैर्य और अनुशासन की मांग करते हैं।

इस तरह इनके बीच आपस में जहाँ स्पष्ट अंतर है, वहीं इस्नके अपने फायदे और नुकसान हैं। दोनों दृष्टिकोणों के बीच बहुत भारी फर्क है, जो यह निर्धारित करता है कि ट्रेडर अपने काम में क्या रवैया अपनाएगा।

मौलिक विश्लेषण (Fundamental analysis) क्या है?

फंडामेंटल एनालिसिस मूल्यों (value) को मापने और देश के अर्थशास्त्र का अध्ययन करने की कला है। फंडामेंटल एनालिसिस मुद्रा की अंतर्निहित आर्थिक स्थितियों की जांच करती है। यदि आप इकॉनोमिक न्यूज़ से अपडेट नहीं हैं तो मैक्रो इकॉनोमिक माहौल (macroeconomic environment) का अनुसरण करना एक थकाऊ दृष्टिकोण हो सकता है। वे कारोबारी जिन्हें आर्थिक खबरों का अच्छा ज्ञान है, और जो मैक्रोइकॉनोमिक्स को समझते हैं, उनके लिए यह बहुत ही मुनाफजनक दृष्टिकोण हो सकता है।

आम तौर पर, कारोबारी कम कीमत पर मजबूत अर्थव्यवस्थाओं वाली मुद्राएं खरीदते हैं और कमजोर प्रदर्शन करने वाली अर्थव्यवस्थाओं की मुद्राएं बेचते हैं। फिर वे इन मुद्राओं को होल्ड करते हैं, इस उम्मीद पर कि मूल्य अपने उचित दर की ओर वापस मुड़ेंगे। कमतर मूल्य (undervaluing currencies) वाली मुद्राओं को वापस उछाल लेने और उनके एक्सचेंज रेट में बढ़ोतरी होने में वर्षों लग सकते हैं।

एक फंडामेंटल ट्रेडर के रूप में, अपने चुने हुए ट्रेड में स्मार्ट बनें। यदि आप ऐसा करने में विफल रहते हैं और गलत रेंज वाले मार्केट (sideways ranging market) की भंवर में फंस जाते हैं, तो कुछ समय के लिए बिना किसी आय के रहना पड़ सकता है।

फंडामेंटल ट्रेडर प्रमुख खबरों वाली घटनाओं से लाभ कमा सकते हैं। आने वाली घटना की जानकारी के साथ एक ट्रेडर के रूप में, आपको संभावित घटनाओं की रिसर्च करनी चाहिए और उनके अनुसार अपनी पोजीशन खड़ी करने के लिए खरीदारी करनी चाहिए। इस घटना के दौरान बाजार में उठा-पटक होगी उसके पहले और बाद की कीमतें बदल चुकी होंगी।

फंडामेंटल ट्रेडिंग पोजीशन बनाने वाले ट्रेडरों (position traders) के लिए भी बेहतर है जो लंबे समय तक अपनी ट्रेड खुली रखते हैं। ट्रेड का यह रूप उनके लिए भी अच्छा है, जो ट्रेड के मैनेजमेंट में ज्यादा वक्त नहीं दे सकते हैं। यदि आप दिन में जॉब कर रहे हैं, या अन्य प्रायोरिटी है, तो आम तौर पर आपके लिए इस फंडामेंटल ट्रेड को अपनाना ही सामान्य है।

इस संबंध में, फंडामेंटल ट्रेड दो प्रकार के कारोबारियों के लिए सबसे उपयुक्त है – वे जो प्रमुख न्यूज़ इवेंट के बारे में अपडेट हैं और अच्छी तरह से रिसर्च कर सकते हैं, या पोजीशन ट्रेडर।

लेकिन यदि आपके पास कंप्यूटर के सामने खर्च करने और चार्ट एनालिसिस का मजा लेने का भरपूर समय है, तो आपके लिए टेकनीकल एनालिसिस बेहतर एप्रोच हो सकता है।

फंडामेंटल एनालिसिस की शुरुआत कैसे करें?

फंडामेंटल एनालिसिस ज्यादातर आगामी न्यूज़ इवेंट के बारे में जागरूक रहना और अकस्मात् घटनाओं पर तुरंत प्रतिक्रिया देना है। आपकी जानकारी के लिए यहां कुछ लेख दिए गए हैं।

आर्थिक कैलेंडर (Economic Calendar): यह कैलेंडर आपकी ट्रेडिंग स्ट्रेट्जी का केंद्रीय हिस्सा होगा। एक फंडामेंटल ट्रेडर हमेशा यह जान लेगा कि बड़ी घटनाएं कब होने वाली हैं। बिना तैयारी वाला फंडामेंटल ट्रेडर जैसी कोई चीज नहीं होती है।

अमेरिकी गैर-कृषि पेरोल रिपोर्ट (US Non-farm Payroll Report): अमेरिकी अर्थव्यवस्था फोरेक्स ट्रेडिंग का बड़ा हिस्सा है। सभी प्रमुख करेंसी पेयर में अमेरिकी डॉलर (USD) शामिल है, इसलिए कोई भी क्गाबर जो इसके मूल्य को प्रभावित कर सकती है, वह बड़ी खबर होगी। नौकरियों से जुड़ी यह रिपोर्ट महीने के पहले शुक्रवार को 08:30 बजे (न्यूयॉर्क, यूएसए) पर जारी की जाती है और आमतौर पर यह फंडामेंटल ट्रेडरों के लिए एक बड़ा फोकस है।

EURUSD एनालिसिस – अपने द्वारा ट्रेड किए जाने वाले पेयर का इतिहास जानें, क्योंकि आप एक ही मौसमी रुझान और प्रदर्शन में दोहराव पा सकते हैं।

फंडामेंटल एनालिसिस के कारोबारी उदाहरण

यहां एक उदाहरण दिया जा रहा है कि पॉजिटिव NFP (गैर-कृषि पेरोल) रिपोर्ट बाजार पर कैसे असर डाल सकती है। अगर कारोबारी इस रिपोर्ट में नौकरियाँ पैदा किये जाने के मजबूत आँकड़ों की उम्मीद में हो, तो रिपोर्ट जारी होने से पहले हम एक ट्रेड शुरू कर देते हैं।

कारोबारी के पास विकल्प है कि कितने लम्बसे समय तक ट्रेड में बने रहना है, क्योंकि यह मुनाफ़े पर असर डालेगा। ट्रेडर या तो एक टेक प्रॉफिट लक्ष्य निर्धारित कर लेते हैं, जिससे वह लक्ष्य पूरा हो जाने पर ट्रेड स्वतः बंद हो जाए। या एक ट्रेडर डेटा की निगरानी जारी रखेगा और मुनाफ़े की राशि कोा बढ़ाने का प्रयास करेगा, और ट्रेड को मैन्युअल रूप से बंद करेगा।

फंडामेंटल एनालिसिस जहाँ चार्ट आधारित नहीं होती है, वहीं यह समझना महत्वपूर्ण है कि चार्ट को कैसे पढ़ा जाए ताकि यह पुष्टि हो सके कि ट्रेड उसी दिशा में जा रहा है जिसकी हमने उम्मीद की थी। नीचे दिए गए उदाहरण में, हम चार्ट से देख सकते हैं कि व्यापारी ने 5 मिनट में 100 पिप्स का लाभ कमाया होगा, और अगर वह व्यापार को जारी रखे तो 200 पिप्स का प्रॉफिट बना सकता है। यह बहुत ही लाभदायक ट्रेड होता।

टेकनीकल एनालिसिस क्या है?

यदि फंडामेंटल ट्रेडर न्यूज़ इवेंट पर फोकस करते हैं, तो टेकनीकल ट्रेडर प्राइस चार्ट (price chart) पढ़ने पर ध्यान केंद्रित करते हैं। टेकनीकल ट्रेडर रुझान और पैटर्न की पहचान करने में सहायता के लिए विभिन्न किस्म के टूल्स और इंडिकेटर का उपयोग करते हैं। यह ट्रेडर को ऊँचे लाभ की संभावना वाली स्थितियों की पहचान करने की सहूलियत देता है। ये वे हैं जिनमें करेंसी पेयर के निश्चित दिशा में जाने का अच्छा मौका होता है।

अनुभवी कारोबारी जानते हैं कि ऊँचे लाभ वाले ट्रेड को अल्पकालिक मुनाफे में कैसे बदलना है। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि बाजार ऊपर की ओर जा रहा है या नीचे की ओर या किनारे पर ठहरा हुआ है। वास्तव में, किसी भी बाजार स्थिति में पैसा बनाने की क्षमता सीएफडी और फोरेक्स ट्रेडिंग का सबसे बड़ा लाभ है।

टेकनीकल एनालिसिस को नहीं सीखने का एक आम बहाना लोगों का होता है, कि इसमें कामयाब होने के लिए आपको कंप्यूटर के सामने पूरे दिन बिताने की ज़रूरत होती है। टेकनीकल ट्रेडिंग का लाभ किसी भी किस्म की बाज़ार-स्थिति में लगातार प्रॉफिट कमाने की क्षमता है, इस अहसास के बिना कि यह आपकी दूसरी नौकरी है।

टेकनीकल एनालिसिस में शुरुआत कैसे करें?

बुनियादी बातों में और ज्यादा एक्सपर्ट होने के लिए कुछ और रीडिंग्स यहाँ दी जा रही हैं।

डाउन थ्योरी (Dow Theory): डाउन थियरी सभी टेकनीकल एनालिसिस का आधार है, इसलिए यह आपके लिए एक अच्छी शुरुआत होगी।

चार्ट: यह हमारी दो खंडों वाली सीरिज का पहला हिस्सा है। चार्ट की किस्मों और टाइम पीरियड की तुलना करने के तरीकों का यह परिचय देगा। जब आप तैयार हों तो दूसरा खंड यहाँ है।

दिशात्मक रुझान (Directional Bias): डाउन थियरी का एक सिद्धांत बताता है कि एक बाजार एक दिशा में तब तक बढ़ता रहेगा जब तक उसकी गति को प्रभावित करने के लिए कुछ बड़ा न हो। यहां आप यह पहचान सकते हैं कि बाजार किस दिशा में जा रहा है।

वेग (Momentum): बाजार अपनी दिशा मोमेंटम कम होने की वजह से बदलते हैं। एक टेकनीकल ट्रेडर को यह जानने की जरूरत है कि मोमेंटम में बदलावों को कैसे जानना है।

टेकनीकल एनालिसिस ट्रेड के उदाहरण

इस उदाहरण में, हम मोमेंटम के इंडिकेटर के रूप में चार्ट का उपयोग कर रहे हैं, कि ट्रेड से कब एग्जिट करना है। चूंकि मोमेंटम में बदलाव न आने तक बाजार में एक रुझान जारी रहेगा, इसलिए हम मोमेंटम में किसी बदलाव की निगरानी कर सकते हैं, और यह समझ सकते हैं कि बाजार कब रिवर्स हो सकता है। इसका एक सटीक उदाहरण है। एक ट्रेडर के रूप में, इस बदलाव को देखते ही हम इस ट्रेड को बंद कर देंगे, यह जानते हुए कि हमने अपने संभावित मुनाफे की अधिकतम सीमा तक मुनाफा नहीं भुनाया है।

EUR/USD चार्ट w/ मोमेंटम इंडिकेटर

टेकनीकल एनालिसिस बनाम फंडामेंटल एनालिसिस

टेकनीकल एनालिसिस और फंडामेंटल एनालिसिस दोनों की अपनी सीमाएं हैं। यही कारण है, कुछ पेशेवर कारोबारी दोनों को इकट्ठे इस्तेमाल करना पसंद करते हैं। यदि कोई व्यापार टेकनीकल और फंडामेंटल डेटा दोनों पर आधारित है तो सफलता की संभावनाएं काफी बढ़ सकती हैं।

एक और स्कूल ऑफ़ थॉट है जो मानता है कि सभी फंडामेंटल फैक्टर पहले से ही डेटा में निहित हैं। इसका मतलब है, बाजार की बेहतरीन भविष्यवाणी करने के लिए आपको सिर्फ टेकनीकल डेटा को पढ़ना होगा। यदि आप इस थॉट स्कूल का अनुसरण करें तो आपके लिए टेकनीकल एनालिसिस व्यापार का बेहतर रूप है।

टेकनीकल एनालिसिस की वैधता पर भी सवाल उठाया जाता है। कुशल बाजार परिकल्पना दावा करती है कि पिछले सभी मूल्यों की जानकारी वर्तमान मूल्य (current price) में पहले ही प्रतिफलित हो रही है। यदि ऐसा है, चूंकि चार्ट में सभी डेटा पुरानी सूचनाएं हैं, उनमें ऐसे आंकडें नहीं हैं, बाजार को टक्कर देने के लिए जिनका फायदा उठाया जा सके। इस तरह, भविष्य के मूल्य का अनुमान लगाने के लिए फंडामेंटल ट्रेडिंग एकमात्र तरीका है।

निष्कर्ष

हर कामयाब ट्रेडर जानता है, उस बिंदु तक पहुंचने के लिए जहाँ आप निरंतर मासिक मुनाफा उगा सकते हैं, आपको अच्छे-खासे अध्ययन, अभ्यास और समर्पण की ज़रूरत होगी। जिस भी तरीके से आप ट्रेड करना चाहें आपको ज्ञान और अनुशासन के साथ ट्रेड करना होता है।

आपको फ़िक्र करने की ज़रूरत नहीं है, कि दोनों दृष्टिकोणों में से कौन सा बेहतर है। इसके बजाय, आप दोनों का लाभ उठा सकते हैं। यह आपको जानकारी भरा बेहतर फैसले लेने में मदद करेगा, और आपको ज्यादा कारोबारी अवसर ढूँढने में मदद करेगा।

Trading Forex and CFDs is not suitable for all investors and comes with a high risk of losing money rapidly due to leverage. 75-90% of retail investors lose money trading these products. You should consider whether you understand how CFDs work and whether you can afford to take the high risk of losing your money.
+ +