टेकनीकल एनालिसिस की शुरुआत को समझने की कोई भी कोशिश पाठक को डाऊ थियरी की ओर ले जाएगा। आज, टेकनीकल एनालिसिस के बारे में हम जो कुछ जानते हैं, डाऊ थियरी हर उस चीज की नींव है। सैद्धांतिक रूप से यह आम नियमों और सिद्धांतों का एक सेट है, जो बाजार में विभिन्न प्राइस एक्शन डेटा पर आपको कार्रवाई करने में आपकी सहायता करते हैं।

चार्ल्स एच. डाऊ ने 19वीं शताब्दी में डाऊ थियरी की स्थापना की और शुरु में स्टॉक के मूल्य में उतार-चढ़ाव का वर्णन करने के लिए इसका इस्तेमाल किया। लेकिन, क्योंकि डाऊ थियरी बाजार की दिशा तय करने में मदद करती है, इसलिए यह एक सार्वभौमिक उपकरण बन जाती है जिसे फोरेक्स जैसे अन्य परिसंपत्ति वर्गों (asset classes) पर भी लागू किया जा सकता है।

डाऊ थियरी डाऊ जोन्स औद्योगिक औसत (Dow Jones Industrial Average) की तुलना डाऊ जोन्स ट्रांसपोर्टेशन औसत (Dow Jones Transportation Average) से करती है। जब इसका इस्तेमाल किया जाता है तो यह पहचाना जा सकता है कि हम टेकनीकल रूप से बुल मार्केट में हैं या टेकनीकल बियर मार्केट में हैं। इसकी पुष्टि करने के लिए कि बाजार टेकनीकल बुल मार्केट में है या टेकनीकल बियर मार्केट में है, DJIA को DJTA के ट्रेंड से मेल खाना चाहिए।

डाऊ थियरी का मूल आधार बाजार के सामान्य स्वास्थ्य के बारे में एक इंडिकेटर के रूप में कार्य करना है। कारोबारियों के लिए, डाऊ थियरी बाजार के उतार-चढ़ाव को समझने के लिए एक अच्छा परिचय है। यह व्यापारियों को कुछ बुनियादी सिद्धांतों के आधार पर यह समझ देता है कि ट्रेड के अवसर कहाँ हैं। डाऊ थियरी के छह सिद्धांत निम्नलिखित हैं:

  1. कीमत सब कुछ की छूट देता है। (The price discounts everything)
  2. बाजार के तीन रुझान हैं। (The market has three trends)
  3. रुझानों के तीन चरण हैं। (Trends have three phases)
  4. औसत को एक दूसरे की पुष्टि करनी चाहिए। (The averages must confirm each other)
  5. वॉल्यूम को ट्रेंड की पुष्टि करनी चाहिए। (Volume must confirm the trend)
  6. एक ट्रेंड को तब तक प्रभावी माना जाता है, जब तक इसने एक निश्चित संकेत नहीं दिया है कि यह अब उलट चुका है।

कीमत हर चीज को डिस्काउंट कर देती है (Price Discounts Everything)

डाऊ थियरी बताती है कि सभी जानकारी जिन्हें जाना जा सकता है, वह पहले से ही कीमत में शामिल हो चुकी है। इसलिए खबरों को डिस्काउंट किया जा चुका है, और कीमत पर इसका एकमात्र प्रभाव जो बाकी है, वह है हमारी मानवीय भावना।

डाऊ थियरी का अर्थ यह होगा कि हम केवल मानव भावना का अध्ययन कर रहे हैं, न कि स्टैटिस्टिकल डेटा का। क्योंकि, प्राइस एक्शन का अध्ययन केवल मानव भावना का प्रतिबिंब है।

बाजार में तीन रुझान होते हैं

डाऊ थियरी निर्धारित करती है कि बाजार में तीन महत्वपूर्ण रुझान होते हैं। उछाल (अपट्रेंड) को लगातार उच्चतर निम्न (higher lows) के बाद लगातार उच्चतर ऊँचाई (higher highs) के रूप में परिभाषित किया जाता है। जबकि गिरावट (डाउनट्रेंड) लगातार निम्नतर निम्न (lower lows) है जिसके बाद लगातार निम्नतर ऊँचाई (lower highs) आती है।

  1. प्राथमिक रुझान।
  2. द्वीतीय रुझान या मध्यवर्ती रुझान (Secondary trend or Intermediate trend)
  3. छोटे रुझान या दैनिक उतार-चढ़ाव।

प्राइमरी ट्रेंड आम तौर पर एक से तीन साल तक चलता है। यह सबसे महत्वपूर्ण रुझान है क्योंकि यह द्वीतीय और छोटे रुझानों को भी प्रभावित करेगा।

द्वीतीय रुझान आम तौर पर तीन सप्ताह से तीन महीने के बीच हावी रहता है और प्राइमरी रुझान के उल्टी दिशा में चलता है।

छोटे रुझान आम तौर पर तीन सप्ताह से भी कम समय तक रहते हैं। छोटे रुझान द्वितीयक ट्रेंड के सापेक्ष ही रहेंगे, उसी तरह जैसे मध्यवर्ती रुझान प्राइमरी रुझान के सापेक्ष बने रहते हैं।

GBP/USD डेली चार्ट

रुझान या ट्रेंड के तीन चरण (Three Phases Of A Trend)

एक रुझान के तीन चरण इस प्रकार होते हैं:

  1. संचय का चरण (Accumulation Phase)
  2. सार्वजनिक भागीदारी का चरण (Public Participation Phase)
  3. वितरण चरण (Distribution Phase)

EUR/USD Chart

संचय का चरण बुल मार्केट यानी तेजी के बाजार का पहला फेज है और सबसे ज्यादा जानकार ट्रेडरों के द्वारा स्मार्ट खरीदारी का प्रतिनिधित्व करता है। आम तौर पर, एक्युमुलेशन फेज एक बियारिश मार्केट यानी मंदी की रुझान वाले बाज़ार के आख़िर में प्रकट होता है और इसकी विशिष्टता बहुत ही नेगेटिव सेंटिमेंट का हावी होना है।

मूल्य चार्ट (price chart) पर, एक्युमुलेशन फेज बाज़ार में कन्सोलिडेशन (consolidation) की एक अवधि में झलकता है।

सार्वजनिक भागीदारी का फेज तब होता है जब कीमत तेजी से बढ़ने लगती है। यह वह चरण है जहां ज्यादर जुझानों को फॉलो करने वाले लोग भाग लेने लगते हैं। यह वह फेज है जो सबसे लंबा चलता है और जिसमें मूल्य में गतिशीलता (price movement) लम्बे समय तक चलती है।

वितरण चरण (distribution phase) बियर मार्केट यानी मंदी के बाज़ार का पहला चरण है और सबसे अधिक जानकार ट्रेडरों द्वारा छोटी स्मार्ट बिक्री का प्रतिनिधित्व करता है। यह संचय के चरण (accumulation phase) के उल्टा है और इसकी विशिष्टता आशावादी सेंटिमेंट और बुनियादी आँकड़ों (fundamental data) की मजबूती है जो पहले से बहुत बेहतर दिखते हैं।

औसत को एक दूसरे की पुष्टि करनी चाहिए (Averages Must Confirm Each Other)

इस सिद्धांत के अनुसार रुझानों की सामग्रिक दिशा (overall direction) की पुष्टि एक सहसंबंधित जोड़ी (correlated pair) द्वारा की जानी चाहिए, इस प्रकार एक-दूसरे की पुष्टि करते हुए। उदाहरण के लिए, EUR/USD एक अपट्रेंड में आगे बढ़ रहा है, हमें प्राइमरी GBP/USD रुझान को भी देखना चाहिए कि वे ऊपर की ओर जा रहे हैं या नहीं। लेकिन यदि GBP/USD का ट्रेंड EUR/USD के रुझान की पुष्टि नहीं करता है, तो हम भटकाव की ओर हैं और कहीं कुछ सही नहीं है। यह इशारा कर सकता है कि जल्द ही रुझानों में कोई बहुत बड़ा बदलाव होने वाला है।

EUR/USD बनाम GBP/USD डेली चार्ट

वॉल्यूम को रुझान की पुष्टि करनी चाहिए (Volume Must Confirm The Trend)

डाऊ थियरी के मुताबिक, ट्रेड की मात्रा यानी वॉल्यूम को प्राइमरी ट्रेंड की दिशा में ही आगे बढ़ना चाहिए। यदि हम एक बुल ट्रेंड में हैं तो हमें खरीदारी के वॉल्यूम में बढ़ोतरी दिखनी चाहिए। अगर हम बियर ट्रेंड में हैं, तो हमें बिक्री के वॉल्यूम में बढ़ोतरी दिखेगी। कमजोर वॉल्यूम एक संभावित कमजोर रुझान का संकेत करता है।

किसी रुझान को तब तक हावी माना जाता है, जब तक यह निश्चित सिग्नल नहीं देता कि यह उलट चुका है

डाऊ थियरी के मुताबिक, एक ट्रेंड के तब तक प्रभावी बने रहने की उम्मीद की जाती है जब तक एक बड़ी घटना नहीं होती जिससे यह उल्टी दिशा में मुड़ जाता है। ट्रेन का अनुसरण करने वाले सिस्टम का यह प्रारंभिक बिंदु है।

फिजिक्स के नियमों की तरह, हम मान लेते हैं कि कोई गतिशील वस्तु अपनी गति में तब तक बनी रहती है तब कोई बाहरी बल इसे अपनी दिशा को बदलने का कारण नहीं बनता है।

ट्रेडरों को ट्रेंड की सामान्य दिशा में ही ट्रेड करना चाहिए जब तक यह एक निश्चित संकेत नहीं दे देता कि ट्रेंड उलट चुका है।

निष्कर्ष

डाऊ थियरी की समझ हासिल करना आपको टेकनीकल एनालिसिस की बेहतर समझ देगा और आपको एक बेहतर ट्रेडर बनाएगा। यह सिद्धांत बहुत बुनियादी हैं लेकिन किसी भी कारोबारी को यह मजबूत आधार देता है कि उसे बाजार कैसे करना है। ये सिद्धांत व्यापारियों के लिए उन नियमों को बताते हैं जिनका उन्हें पालन करना चाहिए, और इस तरह एक नए व्यापारी को अपनी ट्रेड को भावनाओं को दूर करने में मदद करते हैं।

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